नशा से युक्त मानव एक प्रकार से ऐसे जीवन गुजारता है जैसे सिर्फ नशा ही उसका जीवन का सबसे अमूल्य पदार्थ है ,और नशा ही उसकी आवश्यक तत्व है और ईश्वर का विधान उसे अच्छा नहीं लगता जोकि नशा के विरुद्ध है ।उसे सिर्फ रात दिन ऐसा लगता है कि वह नशा करते रहे और मस्त रहे लेकिन क्या ऐसे कोई मस्त रह सकता है ! इसमें समझदार इंसान कहेगा कि ऐसा करना और ऐसा समझना मूर्ख का कार्य है ,और साथ ही नशा के लिए धन की जरूरत होती है जोकि कोई भी अच्छा इंसान परिवार के सदस्य भी ऐसा करने से रोकने का कार्य करते है फिर भी नहीं मानता जो नशा करता है फिर आखिर ऐसा क्यों करते हैं लोग? यदि इससे मुक्त होना है तो एक बार संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक जीने की राह जरूर पढ़ें। wwwjagatgururampalji.org/se book download karen
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