Wednesday, 20 May 2020

Pious work of Saint rampal ji

आधुनिक भारत में अनेक संत, महंत, गुरु, शंकराचार्य, कथावाचक, एवं समाज सुधारक संत हैं। जो समाज को किसी न किसी प्रकार से प्रभावित कर रहे हैं और अपना योगदान समाज हित के लिए कर रहे हैं उन्हीं में से   कुछ समाज को अध्यात्म और भक्ति के सहारे समाज को एक नई दिशा देते हैं जिसकी वजह से भारत को एक नया आयाम मिलता है और अपनी पहचान सभी देशों में उच्च श्रेणी में स्थापित करता  है,अपनी संस्कृति को सभी देशों से लोहा मनवाने हेतु मजबूर करता है।ऐसे ही आधुनिक भारत के ऐसे संत जिसकी ज्ञान चर्चा, अध्यात्म, महिमा विश्व में शिखर पर है जिनका नाम है -जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जो आज भारत में ही नहीं बल्कि अनेक देशों में अपने द्वारा चलाया हुआ सद्भक्ति और समाज सुधारक विचारधारा से अनेक देशों में अपना लोहा मनवाने के लिए मजबूर कर दिया है
संत जी के विचार लगभग 600 वर्ष पूर्व संत कबीर दास जी महाराज से प्रभावित और आधारित ज्ञान से अनेक देशों में परमात्मा की सही भक्ति के साथ-साथ समाज में अनेक प्रकार की कुरीतियां,जैसे -दहेज मुक्त शादी,मृत्युभोज,विवाह में अनेक प्रकार के फिजूल खर्च, बैंड बाजा,नाचना,शराब पीना,मांस खाना,बिना शास्त्र अनुकूल अनेक प्रकार की पूजा,पाठ बंद करवाने का  कार्य किया जिससे  समाज अपना धन खर्च करके बर्बाद हो रहा है।
संत रामपाल जी महाराज के विचार ऐसे हैं जिनको प्रत्येक व्यक्ति अपना कर अपना मानव जीवन बहुत ही सुखद व समृद्ध बनाता है और अध्यात्म मार्ग पर चलकर अपने मानवीय जीवन को  अच्छी प्रकार से व्यतीत करते हुए साथ साथ संपूर्ण समाज को एक अच्छी सोच और विचारधारा से प्रभावित करके एक नया भारत जो अपनी संस्कृति से भरपूर और परमात्मा के अध्यात्म ज्ञान से परिपूर्ण आधुनिक भारत बनाता है। संत रामपाल जी महाराज की विचारधारा है कि भारत देश के सभी लोग इस ज्ञान को आत्मसात करें और विश्व के सभी लोगों को इस विचारधारा पर चलने के लिए प्रेरित करें और वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा फिर से एक बार पूरे विश्व में अपना स्थान बनाए। उन्होंने बताया है कि परमात्मा एक है और उसी की सभी आत्माएं हैं जो सिर्फ परमात्मा की सद्भक्ति से इस धरती लोक पर सुख प्राप्त कर सकती हैं साथ ही सद्भक्ति से परमात्मा तत्व को पहचान कर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। इंसान वही है जो सभी धर्मों में वर्णित अनेक बुराइयों से दूर रहते हुए परमात्मा की सही भक्ति करते हैं और परमार्थ का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया है कि यह संसार परमात्मा ने बनाया है तो उसके द्वारा बताया हुआ संविधान यदि हम नहीं अपनाते हैं तो मानव जीवन को वर्तमान में खराब करते हुए बहुत ही दुख प्राप्त होता है और मरने के बाद आत्मा पशुओं पक्षियों की योनि को प्राप्त करते हुए नर्क की प्राप्ति करता है इसलिए सही ज्ञान कौन दे रहा है ये अपने पवित्र धर्म शास्त्रों में लिखित पुस्तकों को मिलाइए कौन है तत्वदर्शी संत?

संत रामपाल जी महाराज पवित्र गीता जी के माध्यम से यह साबित करते हैं कि तत्वदर्शी संत वह संत होता है जो संपूर्ण मानव के लिए प्रेरणा करता है कि हमें इस संसार में किस महाशक्ति ने पैदा किया। किस लिए उस ईश्वर की शक्ति ने हमको इस धरती पर जन्म दिया किस उद्देश्य को पूरा करने के लिए अन्य प्राणियों से अधिक सुखी जीवन मानव के लिए दिया और मानव को कौन से कार्य करने चाहिए और कौन से नहीं। यदि तत्वदर्शी संत समाज में समय समय पर उपलब्ध नहीं होते तो इस धरती पर पापों का भार बढ़ने लग जाता है और फिर कुदरत अपना बदला लेकर मानव सभ्यता को नष्ट कर देता है इसलिए आज संत रामपाल जी महाराज वह संत हैं जो समाज में व्याप्त अनेक प्रकार की बुराइयां से लोगों को नफरत करा कर और उनके शारीरिक मानसिक,अध्यात्मिक हानियां क्या है परिचित कराते हैं तब लोग निश्चित रूप में छोड़ देते है । परमात्मा की सदभक्ति से ही ऐसा संभव है कि आज लाखों लोग संत जी की भक्ति व विचारधारा से शराब पीना,मांस खाना,पराई स्त्री से गमन करना,नशा, जुआ खेलना, भ्रष्टाचार करना,चोरी करना,मिलावट करना,साथ ही नाचना,गाना, झूठ बोलना,पाखंड करना,और अनेक प्रकार की सामाजिक कुरीतियां को छोड़ देता है। इसलिए संत जी आधुनिक भारत के सबसे संत हैं जिनका विरोध भी होता रहा है लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जिसके बजह से आज भी लोग उनको लगातार अपना गुरू बनाकर अनेक ऐसे लाभ प्राप्त कर रहे है जो आज तक किसी संत महंत ना प्राप्त कर सका ,एड्स, कैंसर,जैसे लाइलाज बीमारियां भी भक्ति से खत्म होती है , इसलिए ही कहते है कि "भक्ति में शक्ति होती है।अधिक जानकारी हेतु-www.jagatgururampalji.org

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